Lekh Lekhani Official | Pankaj Dubey Shayri, Motivation and Quotes|

 


ये आशिक़ी ओ कशमकश मुझे करना नहीं आता मुझे फरेब के रस्ते से गुजरना नहीं आता तुम्हें भी गर हो मोहब्बत तो आज इज़हार कर लो मैं हूं राही मुझे इंतज़ार करना नहीं आता

मैं रुक रहा हूं चार पल कह दो बात अपने दिल की दिल की बातें मुझे इसारों में करना नहीं आता ना हो कुछ भी तो मेरा क़त्ल कर दो किसी के प्यार में मुझे मरना नहीं आता

मैंने देखें हैं लाख मंज़र कुछ हंसी ख्वाब कुछ आजार ग़म मैं शांत हूं मुझे रोना मुझे हंसना नहीं आता तुम्हें आता है तो कह दो जमाने से मेरी बातें। मुझे मेरी ही बातों को सही कहना नहीं आता



लेख - लेखनी







तुम्हारी नादानियाँ अब हमें बर्बाद कर रही है

या तो खुद संभल जाओ या हमे सम्भलने का मौका दे दो ये हर वक़्त तुम्हारा नादान दिल खींचता है हमे तुम्हारी ओर या दिल दे दो या फिर मुझे किनारा दे दो


- Pankaj Dubey






मौसम के बारे में जानकारी नही ली मैने कभी मैं हर मौसम बस तुमसे ही मानता हूँ तुम्हारी नजरों में वसन्त छुपाई बैठी हो अपनी हथेलियों में ग्रीष्म बटोरे हुए और साँसे शरद हैं मानो बर्फ की हवाएं । इसीलिए तुम मेरे लिए

एक पूरा का पूरा मौसम हो ।


लेख - लेखनी





जीवन मे सभी सम्भावनाओं को तलाशा है मैंने सम्भावनाओं का क्या था मिलती गयी ? और भावनायें खत्म होती रही

फिर इकट्ठा किया मैंने अपनी सभी भावनाओं को अब क्या लोग उन्ही "भावनाओं से खेलते हैं।


- @Prabhat. D




बित्ता भर जमीन राज कराती है

बित्ता भर जमीन भीख मंगाती है

तुम मेरे लिए वही बित्ते भर जमीन हो


*लेख - लेखनी*




अब तो धान की फसल भी कटने वाली है मेरा दुख कब कटेगा


लेख-लेखनी




कोई अपना जा चुका है छोड़कर हमेशा के लिए लोग तो बता रहे हैं कि वो अब चला गया

आ नही सकता कभी लौट कर यहाँ पर मेरा दिल तो

उसके जाने का एहसास नही कर रहा

मानना तो बड़ी दूर की बात है । पर लोग सही कह रहे

ओ चला गया है।

-

लेख-लेखनी




जी चाहता है कि अब तुमसे दूरियाँ बना लूँ इससे पहले कि तुम्हे अपनी मजबूरियाँ बना लूँ


*लेख-लेखनी*




कितना अजीब होता है इश्क़ हो जाना

इश्क़ में एक शहर हो जाना

एक शहर से इश्क़ हो जाना

तुमने कभी न किया होगा किसी शहर से इश्क़ अब शायद कोई शहर भी तुमसे इश्क़ ना करे । तुम मेरे लिए एक पूरा का पूरा शहर हो


- PrabhatD



तुम कहते हो ना बड़ा तनाव है बड़ा संघर्ष है जीवन में

कभी पूछो अपने पुरखो से और पूछो घर के बुजुगों से

कैसे बसाई होंगी इन विरानों में बस्तियाँ उन्होंने तुम ट्रैक्टर से जोतने में भी थक कर बैठ जाते हो पुछो उन बैलों से कैसे

खींचे होंगे तुम्हारे हल को

और तुम्हारे विकास की इस पहिये को

तुम्हे बड़ी शर्म आती है इन पुराने दौर के लोगों पर उनके तौर तरीकों पर

कभी पूछो अपनी बुढ़िया दादी से जो आज पड़ी रहती है तुम्हारे आँगन के टूटी खाट पर

कैसे पीसे होंगे उन्होंने अपने श्रम से तुम्हारे बदनसीबी को अपने घर की चाकी में

तब कहीं तुमने पाया है अपना ये फालतू के आधुनिक तौर तरीके


लेख - लेखनी




मैं आखिर क्यों रखूंगा किसी पराये हुए की यादें समेट कर कटी हुई पतंग कभी दुबारा मांझे के पास आती है क्या ? अगर कोई अपना था तो यूँ गया ही क्यूँ

जिंदगी इतनी सस्ती है की किसी के जाने से रुक जाती है

क्या ?


*लेख-लेखनी*



जब इंसानियत खत्म हो जाएगी निर्ममता आ चुकी होगी सबमें जब तुम भी इंसानियत को खत्म कर चुकी होगी खुद में

तब आना मेरे पास

मैं मिलूंगा तुम्हे उस निर्मम माहौल से दूर कहीं

अपने अंदर की इंसानियत को बचाये हुए ||


लेख-लेखनी




पथ शूल रहे आगंतुक से

मैं अब रहा अकिंचन सोच यही जीवन निर्ममता से भरा हुआ मैं इनमें करुणा खोज रहा सब विषय भोग विष भरा हुआ मैं पीयूष सा जान रहा

अब राही हूँ तो राही हूँ

क्या सही चला क्या भटक रहा जिस रास्ते पर चला गया

अब उसी राह में सिमट गया इस समाज के हर कोने में

बस अंधियारा छाया

मैं इसमें प्रकाश ही खोज रहा हूँ।


-Prabhat...D




मेरे मन को बदलने में भी उतना ही समय लगता है जितना कि किसी सत्ताधारी को सत्तारूढ़ होकर सत्ता से हटने तक वो समय कुछ भी हो सकता

तुम्हारी पलकों के झपकने से लेकर तुम्हारी द्वारा तोड़ी गयी मर्यादाओं तक का भी

परन्तु मेरी इक्षा होगी कि मैं बस तुम्हारी पलकों भर का समय

लूँ ।


Prabhat... D



ये तख्त ए ताज ये रवायतें ये बड़ी बड़ी इमारतें

तू

कुछ नही चाहिए तुझसे ऐ जिंदगी बिना बंदिशों के बीत जाए बस यही आरज़ू है ।


@PRABHAT....D




चल जिंदगी तुझे एक नई जिंदगी दिखाता पड़ाव कोई भी हो अब तू देख कैसे निभाता हूँ

कोई गया, कोई जाएगा, कोई आया और कोई आएगा

अब बस देख सब छोड़, भूल के कैसे मैं आगे निकल जाता

चल जिंदगी तुझे एक नई जिंदगी से मिलाता हूँ ।


लेख-लेखनी




क्या कहते हो

खोजना पड़ेगा या बूझना पड़ेगा

खोजना है तो तुम खोजो खुद को मैने तुम्हे खोज लिया है।

तुम खुद को बस आईने में ही देख पाते हो मैं तुम्हे आईने के उस पार भी देख लेता हूँ। तुम खुद को छिपा सकते हो

बाप से माँ से और अपने बीबी और बच्चो से और अपने तमाम रिश्तेदारों से लेकिन खुद को छुपा नही सकते तुम मुझसे यानि एक दोस्त से

मैं जानता हूँ तुम्हारी खामियों को

खामोशियों को और तुम्हारी हृदय की उस भीतरी वेदनाओं को जो कह नही पाते किसी से

लेकिन खुद को छुपा नही सकते तुम

मासे यानि एक दोस्त से


Prabhat... D



तुमको तो मिल ही जाएगी शोहरत जमाने की वो क्या मिला सराहने वाला नहीं मिला मैंने भी तुमको पाने की कोशिश हजार की मुझको मेरा मुकाम मुकम्मल नहीं मिला

दौलत की आरजू में दांव खेल गए तुम दौलत मिली तो खर्चने दहर नहीं मिला

अपने किए पे आप तो जिंदा ही मर रहे हमको हमारे हिस्से का ज़हर नहीं मिला

जीने की आरजू में ऐसे मर गएं की आप मुझको मेरे ईनाम का जौहर नहीं मिला घर की तलाश ऐसी की घर से भटक गएं घर में भटकते रह गएं पर घर नहीं मिला

अब आप वी से कह दिजिए अंजाम ए फलसफा दुश्वारियां कि ऐसा फिर मंज़र नहीं मिला

ऐसा मिला तो क्या ही मिला जब सब ही लुट गया कह दिजिए कुछ भी मुकम्मल नहीं मिला


लेख - लेखनी




झुकी हैं पलकें बड़े अदब से

ये दिल की बातें बता रही हैं कहो मोहब्बत है सिर्फ मुझसे या फिर ये मुझको सता रही हैं


लेख - लेखनी




माना तुम बहुत बड़े व्यापारी हो

पर खरीद लो

अपने लिए सारी खुशियाँ सारे सुकून

और बेच दो मेरी सारी तकलीफें सारे गम

बेच दो मेरे सारे जज्बात जिनसे कमजोर पड़ जाता हूँ मैं

ले आओ खुद के लिए खरीदकर थोक भाव मे

वो छड़ जिनमे तुम शांत रह सकते हो

मगन रह सकते हो

और निरोग भी


Prabhat D




जीवन मे दो शब्द बड़ी भूमिका निभाते हैं अनुभव एवं अनुभूति

*अनुभव* कुछ होने का और * अनुभूति * किसी के होने की अनुभव आपकी अपनी अचल सम्पति है किंतु अनुभूति अचल नही है मैं अनुभूति को अधिक महत्व न देते हुए अनुभव को श्रेष्ठ मानता हूँ।

क्योंकि कुछ होने का अनुभव आपका साथ कभी नही छोड़ सकता परन्तु किसी के होने की अनुभूति कभी भी खत्म हो

M

सकती है ।


- PrabhatD




मुझे खबर है तेरे हर खबर की

मैं तेरे हर खबर की खबर पर नजर रखता हूँ ।।


लेख - लेखनी




तुम वक़्त बदलने में लगे हो, और वक़्त तुम्हे बदलने में घबराओं मत ये वक़्त तुम्हे भी बदल देगा और तुम्हारे वक़्त को भी

बस वक़्त तो थोड़ा सा वक़्त तो दो

- PrabhatD

BE

KIND




कभी सोचता हूँ कि युद्ध का अनुभव करूँ मैं the law कभी सोचता हूँ कि मैं मृत्यु के आँचल से लिपटू फिर सोचता हूँ युद्ध तो आता नही

तो सीखना मैं चाहता हूँ जैसे अभिमन्यु ने सीखा फिर युद्ध मैं भी करना चाहता हूँ कृष्ण सा फिर चाह हो जाती है मेरी भीष्म जैसी मृत्यु हो

जब तक न चाहूँ मृत्यु को मैं वो हाथ बांधे हो खड़ी कोने में जैसे

फिर सत्य को में चाहता हूँ सीख लूँ युधिष्ठिर से फिर गुरु भी एक चाहिए मुझे द्रोणाचार्य सा जो सिखा सके मुझे युद्ध की सारी कलाएँ सारथी फिर कृष्णा सा और पार्थ जैसा शौर्य हो । बाहुबल हो कर्ण सा निज शौर्य मैं गाउँ नही अंत अभिलाषा यही की युद्ध को पाऊँ नही । ।


@Prabhat...D




मेरा भी बहरहाल ये अंजाम ए सफ़र रहा बीती सफ़र में उम्र हमसफ़र नहीं मिला फिर लौटने का कोई भी मतलब नहीं बचा

मंजिल मिली तो आप सा मंजर नहीं मिला

लेख-लेखनी





कभी-कभी लगता है

मैं किसी की जिंदगी में

ज़बरदस्ती उस जगह घुसे जा

रहा हु जहाँ मेरे लिए कोई जगह ही नही । जैसे दो पाटे के बीच थोड़े

देर के लिए कुछ दूरी बनी

और मैं जगह समझकर घुस गया हूँ अब अंतर्मन गवाही नही दे रहा है

मैं अब जाना चाहता हूँ तुम्हारी जिंदगी से उस जगह से जो मेरी नही है और शायद कभी थी भी नही

लेख - लेखनी





उम्मीद से शुरू होकर अफसोस पर खत्म देखो ! अब तो

ये साल भी खत्म

लेख - लेखनी



तुम रकबे पर ध्यान दो, रकबे के मालिक पर नही रकबा वही रहता है, रकबे का मालिक नीलाम हो जाता है।


लेख - लेखनी




भुलाना उनको आसान है जिन्होंने आपको याद करने

के लिए कुछ नहीं दिया हो!

जिसके साथ अपने एक पल में सदियां जी हो उसे कैसे भुला सकते हैं?


लेख-लेखनी







एक जमीन अपनी होगी एक आसमान अपना होगा

एक सफलता अपनी होगी

एक विफलता भी अपनी

नापेंगे हम भी अपनी जिंदगी की लंबाई चलेंगे जहाँ तक भी जाना होगा

- PrabhatD



तुम इस सफर में बड़ा ठहर-ठहर कर चल रहे हो वहीं रुकने का इरादा है क्या जहां के लिए निकले हो ?

लेख-लेखनी

TRAVEL IS

GOOD FOR

THE SOUL

RED ROCKS

PASSPORT





जाता है दिसम्बर कुछ लेकर नही जाता देकर ही जाता है कुछ न कुछ यादें, सबक और पहचान जो छोड़ कर गए उनके लिए सबक

और आने वाले के लिए जगह

अपनो की यादें अब ओ हो ना हो

पर याद रखना ये दिसम्बर कभी कुछ लेकर नही जाता ।


लेख - लेखनी




अरे ! अब ठहर भी जाओ इतना सफर भी अच्छा नही होता किसी शहर से पनाह मांग लो बेपनाह होना अच्छा नही होता ।

लेख - लेखनी

TRAVEL IS

GOOD FOR

THE SOUL






हम सब देखेंगे एक रोज नज़ारा वो भी जब तुम लिखोगे खुद को और पढ़ेंगे हम खुद को ।

तुम बिराने में बजती धुन बयाँ करना हम सुन लेंगे भीड़ में भी तुम्हारी मीठी सी आवाज


लेख - लेखनी




दुश्मनों के घर से आई मिठाइयों का पैकेट भी ले लेना


इंतज़ार करना उनकी खुशियों के मौक़ों का

कभी उतार देना सब एहसान उनका भेज कर मिठाइयाँ तुम भी उनको । इस तरह खत्म कर दोगे उनके एहसान भी और खत्म कर लोगे बीच की दुश्मनी भी

लेख-लेखनी





एक उम्मीद अब भी मुझे तेरे लौट आने की है गर नही आयी तो मुझे भी आरजू मेरे लौट जाने की है।

@lekhlekhaniofficial

- Pankaj Dubey

-




तेरे झूठ पर भी यकीन है मुझे घबरा मत ! तेरा सच तो और भी असरदार होगा

लेख-लेखनी

- Pankaj Dubey




ओ हमसे बात तो करते हैं पर बात किसी और की करते

हमारी बाते उन्हें पसन्द हैं

मगर हमारी बात नही करते हैं।

लेख - लेखनी

Dankaj Dubly








अब मेरे पास हर बात के लिए वक्त नही है क्योंकि अब मेरा दिल पहले जैसा शख्त नही है ।

@lekhlekhaniofficial

- Pankaj Dubey





ये आईना क्यों माँगता है मेरी पहले जैसी सूरत मुझसे ऐ मेरी शक्ल बता इसको की ना तो तू पहले जैसी रही ना मैं

तू

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— Pankaj Dubey





ये गगनचुंबी इमारते, रवायतें तख़्तों ताज सब के मिजाज मस्त थे इक दिन पर हुए खाक

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--Pankaj Dubey




हम उन्हें बा सबब, बे सबब, बा अदब जानते हैं और वो कह रहे हो हम तुम्हे कब जानते हैं।

लेख-लेखनी

Pankaj Dubey







दिल बसर करे तो करे कैसे तेरा बसर तो कहीं और है दिल गुजर करे तो करे कैसे तेरा गुजारा तो कहीं और है मुझे खबर है कि तू मुसलसल मेरा है ही नही मगर दिल तुझे छोड़ कहाँ जाता कहीं और है।

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-Pankaj Dubey






तू रंगों की ख्वाहिश है तू ख्वाहिशों का रंग है

@lekhlekhaniofficial






वो दिन जब हँसी अंदर से होती थी । अब बस चेहरे हंसते हैं दिल नही

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— Pankaj Dubey





अपनी मासूमियत और बचपने को खुद में समेटे रखो

बचाये रखो इन्हें अपने अंदर मत् होने देना कभी भी खत्म तुम इनको

क्या तुम इतनी महँगी चीज़ इतने सस्ते में दे दोगे ?





बातों को बोझ तले और बोझ को बातों तले

दबाना सीख लिया मैंने

दबा हों सबक ए सलिखा तले जिंदगी में क्या क्या बताऊँ उनको अब कैसी कैसी खुमारी है अपनी बातों को उनसे छुपाना सीख लिया मैंने भी

राह ए मंजिल तो हर बार मंजिल नही हो सकती

अब मंजिल के साथ साथ राहें भूलना भी सीख लिया मैंने उंगलियाँ पकड़ के गट्टे और गट्टे से बाजू तक पहुंचने लगते हैं लोग लोगों से अपने हाथ छुड़ाना सीख लिया मैन भी

बेसबब, बेअसर बड़ा लाचार हूँ मैं

लोगों को तमीज़दार बताना छोड़ दिया मैंने भी

@lekhlekhaniofficial-

Pankaj Dubey






तुम वक्त के बारे में जानते ही

क्या हो ?

वो अभी तुम्हे और रुलाएगा तुमने किसी का वक्त लेकर कभी उसे जो रुलाया था

@lekhlekhaniofficial


- Pankaj Dubey






उसका सब कुछ लेकर भी तुमने उससे प्यार की कीमत मांगी है उसने जिक्र तक नहीं किया तुमने हिसाब कर दिया

@lekhlekhaniofficial

-Pankaj Dubey






सामने आ जाओ डर कैसा है अच्छा सही सही बताना

मेरे बगैर ये सफर कैसा है ?

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- Pankaj Dubey





मेरे जाने का वक्त होगा तो मैं चला जाऊंगा तुम बस तनिक शाम ढलने का इंतजार तो करो

@lekhlekhaniofficial

-Pankaj Dubey






वक्त सिलसिले वार, इस दरमियां गुजर जाएगा

मैं यहां से जा चुका होऊंगा, जब तक तू खबर पाएगा ।

- Pankaj Dubey




बड़े बड़े साम्राज्य खत्म हो गए इसलिए क्योंकि उन्हें

शत्रुओं को कुचल देना था

और हमने शत्रुओ का दिल जीतने की परंपरा बना ली । शत्रुओं का दिल जीतने से अच्छा है उन्हे उनकी नस्लों के साथ खत्म कर दो

- Pankaj Dubey





एक युग स्वयं को बड़े ही हर्षोल्लास और शोर मचाकर शुरू करता है बड़ी बड़ी संघर्ष की सीमाओं को पार करके कई पीढ़ियों को तैयार करके दूसरे आने वाले पीढ़ियों को शौप देता है और फिर वही युग स्वयं को इतने शांत भाव से बिना किसी को बताए चुपचाप अकेले निकल जाता है इस युग का अंत करके और किसी नए युग की खोज में ।

प्रेरणा :- जीवन से मृत्यु तक का सफर

@lekhlekhaniofficial

— Pankaj Dubey







तुम वक्त के बारे में जानते ही

क्या हो ?

वो अभी तुम्हे और रुलाएगा तुमने किसी का वक्त लेकर कभी उसे जो रुलाया था

@lekhlekhaniofficial

- Pankaj Dubey







इन्तेजार, खैरियत और बसर तुम बिन ये शहर अजनबियों का बसर और सब

अजनबी हैं तुम्हारे सिवा यहाँ

@lekhlekhaniofficial

— Pankaj Dubey







जाता है दिसम्बर कुछ लेकर नही जाता देकर ही जाता है कुछ न कुछ यादें, सबक और पहचान जो छोड़ कर गए उनके लिए सबक

और आने वाले के लिए जगह

अपनो की यादें अब ओ हो ना हो

पर याद रखना ये दिसम्बर कभी कुछ लेकर नही जाता ।


लेख - लेखनी







वक्त सिलसिले वार, इस दरमियां गुजर जाएगा

मैं यहां से जा चुका होऊंगा, जब तक तू खबर पाएगा ।

- Pankaj Dubey






आओ कभी गमगीन होकर निराशा भरी रात में

जलाएंगे अपनी पुरखों की दी हुई ढकनी में लालटेन के शीशे में जो अब दिखते नही बाज़ारों में बिकते नही दुकानों में

टिकते नही जुबानों पे

उसमे जलाएँगे नए फैशन की एक मोमबत्ती पुरानी लालटेन

और पियेंगे साथ में एक एक पैग

तुम अपने गम सुनाना हम सुनेंगे इतनी बारीकियों से

की तुम्हारे चेहरे को देख कर बता देंगे तुम्हारे आने वाले आँसुओ की संख्या ॥

Prabhat... D








माना तुम बहुत बड़े व्यापारी हो

पर खरीद लो

अपने लिए सारी खुशियाँ सारे सुकून

और बेच दो मेरी सारी तकलीफें सारे गम

बेच दो मेरे सारे जज्बात जिनसे कमजोर पड़ जाता हूँ मैं

ले आओ खुद के लिए खरीदकर थोक भाव मे

वो छड़ जिनमे तुम शांत रह सकते हो

मगन रह सकते हो

और निरोग भी

Prabhat D






जीवन मे दो शब्द बड़ी भूमिका निभाते हैं अनुभव एवं अनुभूति

*अनुभव* कुछ होने का और * अनुभूति * किसी के होने की अनुभव आपकी अपनी अचल सम्पति है किंतु अनुभूति अचल नही है मैं अनुभूति को अधिक महत्व न देते हुए अनुभव को श्रेष्ठ मानता हूँ।

क्योंकि कुछ होने का अनुभव आपका साथ कभी नही छोड़ सकता परन्तु किसी के होने की अनुभूति कभी भी खत्म हो सकती है ।

- Prabhat D…







मुझे खबर है तेरे हर खबर की

मैं तेरे हर खबर की खबर पर नजर रखता हूँ ।।

लेख - लेखनी








कभी सोचता हूँ कि युद्ध का अनुभव करूँ मैं कभी सोचता हूँ कि मैं मृत्यु के आँचल से लिपटू फिर सोचता हूँ युद्ध तो आता नही

तो सीखना मैं चाहता हूँ जैसे अभिमन्यु ने सीखा फिर युद्ध मैं भी करना चाहता हूँ कृष्ण सा फिर चाह हो जाती है मेरी भीष्म जैसी मृत्यु हो

जब तक न चाहूँ मृत्यु को मैं वो हाथ बांधे हो खड़ी कोने में जैसे

फिर सत्य को में चाहता हूँ सीख लूँ युधिष्ठिर से फिर गुरु भी एक चाहिए मुझे द्रोणाचार्य सा जो सिखा सके मुझे युद्ध की सारी कलाएँ सारथी फिर कृष्णा सा और पार्थ जैसा शौर्य हो । बाहुबल हो कर्ण सा निज शौर्य मैं गाउँ नही अंत अभिलाषा यही की युद्ध को पाऊँ नही । 

@Prabhat...D







कभी-कभी लगता है

मैं किसी की जिंदगी में

ज़बरदस्ती उस जगह घुसे जा

रहा हु जहाँ मेरे लिए कोई जगह ही नही । जैसे दो पाटे के बीच थोड़े

देर के लिए कुछ दूरी बनी

और मैं जगह समझकर घुस गया हूँ अब अंतर्मन गवाही नही दे रहा है

मैं अब जाना चाहता हूँ तुम्हारी जिंदगी से उस जगह से जो मेरी नही है और शायद कभी थी भी नही

लेख - लेखनी


उम्मीद से शुरू होकर

अफसोस पर खत्म

देखो ! अब तो

ये साल भी खत्म


लेख-लेखनी








ओ जलते हुए शहर को बुझा रहे हैं

बुझा रहे हैं या बहा रहे है

खुद कलेजे में है आग औरों की

अपनी प्यारी बातों से सबको जगा रहे हैं

दब दब कर नीचे मरे हैं जमीर इनके

सबके जामीर ये जगा रहे हैं।

दौलत को मिट्टी बताते हैं फक्र से

गला रेत रेत कर कौड़ी जुटाते हुए लोग

@lekhlekhaniofficial

- Pankaj Dubey






भुलाना उनको आसान है जिन्होंने आपको याद करने

के लिए कुछ नहीं दिया हो!

जिसके साथ अपने एक पल में सदियां जी हो उसे कैसे भुला सकते हैं?

लेख-लेखनी

Pankaj Dubey






एक जमीन अपनी होगी एक आसमान अपना होगा

एक सफलता अपनी होगी

एक विफलता भी अपनी

नापेंगे हम भी अपनी जिंदगी की लंबाई चलेंगे जहाँ तक भी जाना होगा


- Pankaj Dubey







तुम इस सफर में बड़ा ठहर-ठहर कर चल रहे हो वहीं रुकने का इरादा है क्या जहां के लिए निकले हो ?

लेख-लेखनी


Pankaj Dubey






अरे ! अब ठहर भी जाओ इतना सफर भी अच्छा नही होता किसी शहर से पनाह मांग लो बेपनाह होना अच्छा नही होता ।

लेख - लेखनी


Pankaj Dubey







हम सब देखेंगे एक रोज नज़ारा वो भी जब तुम लिखोगे खुद को और पढ़ेंगे हम खुद को ।

तुम बिराने में बजती धुन बयाँ करना हम सुन लेंगे भीड़ में भी तुम्हारी मीठी सी आवाज

लेख - लेखनी

Pankaj Dubey







दुश्मनों के घर से आई मिठाइयों का पैकेट भी ले लेना

इंतज़ार करना उनकी खुशियों के मौक़ों का

कभी उतार देना सब एहसान उनका भेज कर मिठाइयाँ तुम भी उनको । इस तरह खत्म कर दोगे उनके एहसान भी और खत्म कर लोगे बीच की दुश्मनी भी

लेख-लेखनी

Pankaj Dubey






एक उम्मीद अब भी मुझे तेरे लौट आने की है गर नही आयी तो मुझे भी आरजू मेरे लौट जाने की है।

@lekhlekhaniofficial

- Pankaj Dubey

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तेरे झूठ पर भी यकीन है मुझे घबरा मत ! तेरा सच तो और भी असरदार होगा

लेख-लेखनी

- Pankaj Dubey






ओ हमसे बात तो करते हैं पर बात किसी और की करते

हमारी बाते उन्हें पसन्द हैं

मगर हमारी बात नही करते हैं।

लेख - लेखनी

Dankaj Dubly






अब मेरे पास हर बात के लिए वक्त नही है क्योंकि अब मेरा दिल पहले जैसा शख्त नही है ।

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- Pankaj Dubey





ये आईना क्यों माँगता है मेरी पहले जैसी सूरत मुझसे ऐ मेरी शक्ल बता इसको की ना तो तू पहले जैसी रही ना मैं

तू

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— Pankaj Dubey






ये गगनचुंबी इमारते, रवायतें तख़्तों ताज सब के मिजाज मस्त थे इक दिन पर हुए खाक

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--Pankaj Dubey







हम उन्हें बा सबब, बे सबब, बा अदब जानते हैं और वो कह रहे हो हम तुम्हे कब जानते हैं।

लेख-लेखनी

Pankaj Dubey




दिल बसर करे तो करे कैसे तेरा बसर तो कहीं और है दिल गुजर करे तो करे कैसे तेरा गुजारा तो कहीं और है मुझे खबर है कि तू मुसलसल मेरा है ही नही मगर दिल तुझे छोड़ कहाँ जाता कहीं और है।

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-Pankaj Dubey





तू रंगों की ख्वाहिश है तू ख्वाहिशों का रंग है

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Pankaj Dubey







मैं दूर तलक देखता रहा दूसरी तरफ और मंजिल मेरे करीब बड़े करीब से गुजर गयी।

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— Pankaj Dubey






एहसास को एहसास करके जी रहा

हूँ मैं

एहसास का एहसास अच्छा होता है कभी उस एहसास का एहसास तुम्हे भी हो

@lekhlekhaniofficial

Pankaj Dubey



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